खाद्य तेलों के बढ़ते भाव आखिर सरकार चाहती क्या है?
देश में खाद्य तेलों के बढ़ते भाव को काबू करने के लिए सरकार ने खाद्य तेलों और तिलहनों के स्टाक पर अब स्टाक सीमा आगामी 30 जून तक बढ़ा ही है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने गत अक्टूबर में खाद्य तेलों व तिलहनों पर 31 मार्च तक स्टाक सीमा लगाई थी और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर छोड़ दी थी।
उस समय केवल 6 राज्यों उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और बिहार ने ही इसे लागू किया था और स्टाक की सीमा भी हर राज्य ने अपनी खपत या उत्पादन को देखते हुए तय की थी।
बहरहाल, अब सरकार ने स्टाक सीमा लागू करने के काम को अपने हाथ में लिया है और एक अधिसूचना जारी करके स्टाक सीमा की मात्रा भी तय कर दी है।
बढ़ते भाव बेबस व्यापारी
उल्लेखनीय है कि भारत सहित विश्व भर में खाद्य तेलों के भाव में गत लगभग एक वर्ष से तेजी आ रही है और गत वर्ष अगस्त सितम्बर में विश्व में कई वर्ष के रिेकार्ड पर पहुंच गए थे और तेजी का प्रमुख कारण विभिन्न कारणो से अमेरिका में सोयाबीन का उत्पादन, मलेशिया और इंडोनेशिया में पाम आयल का उत्पादन, कनाडा और यूरो पर कनोला—रेपसीड का उत्पादन तथा यूक्रेन आदि में सनफ्लावर सीड के उत्पादन कम होना रहा।
व्यापारी लाचार
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि देश में खाद्य तिलहनों—तेलों का उत्पादन इनकी खपत की तुलना में कम है और अपनी खपत के एक बड़े भाग को आयात द्वारा पूरा किया जाता है। यही नहीं भारत से सबसे अधिक विदेशी मु्द्रा कच्चे तेल के बाद खाद्य तेलों के आयात पर ही खर्च होती है।
देश में खाद्य तेलों के भाव विदेशी बाजार पर निर्भर हैं और जब वहां पर तेजी आई तो इसका असर भारतीय बाजारों पर आना भी स्वाभाविक था।
सारे तीर चलाए
सरकार ने खाद्य तेलों के भाव को बढ़ने से रोकने के लिए अपने तरकश में रखे सारे तीर चलाए लेकिन भाव तब ही कम हुए जब विश्व बाजार में घटे।
सरकार ने पाम आयल के आयात पर दो बार ड्यूटी कम की लेकिन इसका लाभ भारतीय उपभोक्ता को नहीं मिला क्योंकि इंडोनेशिया और मलेशिया के निर्यातकों ने भाव बढ़ा दिए। पाम आयल के कुल कारोबार में दोनों देशों का पूरी तरह एकाधिकार है। इसके साथ ही वहां पर उत्पादन भी कम था।
सरकार ने सोया और सन आयल के भाव पर ड्यूटी कम कर दी लेकिन रुपया सस्ता होने और विश्वव बाजार में भाव तेज होने से इसका असर भी कोई खास नहीं हुआ।
सरकार ने व्यापारियों पर स्टाक सीमा भी थोपी लेकिन इसका भी वांछित असर नहीं हुआ।
गिरावट आई
हां! खाद्य तेलों के भाव में गिरावट आई लेकिन तब जब विश्व बाजार में गिरावट आई। ब्राजील में सोयाबीन की रिकार्ड फसल व इंडोनेशिया तथा मलेशिया में 2022 में पाम आयल में उत्पादन में सुधार के अनुमानों से भाव में गिरावट आई लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाई क्योंकि ब्राजील ने मौसम ने धोखा दिया और वहां पर उत्पादन अब गत वर्ष से कम होने की बात कही जा रही है। इससे भाव में फिर तेजी आने लगी है।
पाम आयल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश घरेलू बाजार में पाम आयल के बढ़ते भाव से परेशान है और उसने वहां से आयात पर अंकुश लगा दिया है।
वहां से सप्लाई कम होने से मलेशिया में पाम आयल के भाव 5,700 रिंंगित के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गए।
अब क्या होगा
खाद्य तेलों के भाव में गिरावट आने की संभावना अब फिर दूर होती जा रही है। सरकार ने सभी उपाय कर लिए हैं। हाल के स्टाक सीमा लागू करने से भी भाव में गिरावट की संभावना सीमित ही है।
अब भाव में तब ही गिरावट आ सकती है जब सरकार आयात को पूरी तरह शुल्क मुक्त कर दे लेकिन यह देश के किसानों और तेल उद्योग—व्यापार के लिए घातक होगा।
अब सरसों की फसल सिर पर है। इस वर्ष रिकार्ड उत्पादन होने की संभावना है। ऐसे में स्टाक सीमा लागू करने से किसानों को उचित भाव नहीं मिल पांएगे तो सरकार का आत्मनिर्भर भारत का मिशन पूरा नहीं हो पाएगा।
देखना है कि अब सरकार कौन सा तीर चलाती है।
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