महंगाई सरकार की परेशानी लगातार बढ़ाती ही जा रही है। सरकार इसे रोकने का जितना प्रयास कर रही है यह उतनी बेकाबू होती जा रही है। इस वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह में महंगाई की दर 3.5 प्रतिशत थी जो मई के अंत में बढ़ की 8.24 प्रतिशत की दर पर पहुंच चुकी है।
महंगाई की दर की वृद्वि का यह कोई अंतिम पढ़ाव नहीं है। सरकार ने इस सप्ताह में पेट्रोल और डीजल के जो भाव बढ़ाए हैं उनका असर अभी आना बाकी जो आगामी दो या तीन सप्ताहों में इस दर को दहाई के अंक के पार पहुंचा सकता है।
दोषी कौन?
अप्रैल तक केंद्रीय सरकार इस महंगाई के लिए केवल अनाज व्यापारियों को दोषी मान रही थी और राज्य सरकारों से अनाज व दालों पर स्टाक लिमिट लगाने का सुझाव दे रही थी। कुछ राज्य सरकारों ने ऐसा किया भी। अनेक राज्यों ने छापामारी कार्यवाही करके व्यापारियों में दहशत फ़ैला दी। लेकिन मंहगाई काबू नहीं आ पाई। अब सरकार ने पेट्रोल व डीजल के भाव बढ़ाकर स्वयं आग में घी डाल दिया है।
Saturday, June 7, 2008
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