Saturday, January 8, 2022

काटन में और तेजी के लिए एक बार मंदा जरुरी/Correction in cotton prices needed for fresh hike

 काटन में और तेजी के लिए एक बार मंदा जरुरी

वेबीनार में अधिकांश वक्ताओं का कथन

राजेश शर्मा

देश में काटन के भाव नित नया रिकार्ड बना रहे हैं और अब आम व्यापारी यह सोच रहा है कि क्या अब भाव और तेज जाएंगे या गिरेंगे?

उल्लेखनीय है कि देश में काटन के भाव तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुक हैं क्योंकि देश में काटन का उत्पादन कम होने की आशंका के साथ ही विश्व बाजार में भी भाव 10 वर्ष की चोटी पर बने हुए हैं।

मंदा जरुरी

शनिवार को केडिया एडवाईजरी, आईएसीओएसएआईए और एमसीएक्स द्वारा आयोजित काटन काम्पलैक्स पर आयोजित एक वेबीनार में अधिकांश वक्ताओं का यह मानना था कि काटन के भाव में और तेजी की संभावना है लेकिन इसके लिए भाव में एक बार मंदा आना जरुरी है।

लगभग सभी वक्ताओं का कहना था कि तेजी का कारण विश्व बाजार के साथ ही देश में काटन का उत्पादन कम होना है जबकि काटन यार्न की मांग में बढ़ोतरी हो रही है।

वक्ताओं का कहना था कि यह कहना गलत है कि सट्टेबाजी के कारण भाव बढ़ रहे हैं बल्कि तेजी का कारण मांग और सप्लाई है।

केडिया एडवाइजरी के श्री अजय केडिया के अनुसार वास्तव में देश से गारमेंट का निर्यात बढ़ रहा है और काटन यार्न की कपड़ा मिलों की मांग लगातार बनी हुई है। 

श्री केडिया के अनुसार टैक्नीकली अभी पूरे काटन काम्पलैक्स यानि कपास, काटन, तेल और खल में हाजिर और वायदा में तेजी लग रही है।

उनका कहना था कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाव काफी तेज हो चुके हैं लेकिन अभी और तेजी की संभावना है क्योंकि विश्व बाजार तेज है और उत्पादन भी कम है लेकिन इसके लिए एक बार मंदा आना जरुरी है। यह मंदा कब और कितना आएगा यह समय बताएगा।

आईएसीओएसएआईए के संयोजक श्री सुधीर अग्रवाल के अनुसार उनके सर्वे के अनुसार काटन का उत्पादन कम है और भाव में तेजी आ चुकी है। 

आगामी कुछ महीने भाव के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। व्यापारियों का व्यापार सतर्कतापूर्वक करना चाहिए।

काटन एसोसिएशन आफ इंडिया के प्रेजीडेंट श्री अतुल गनात्रा का कहना था कि एसोसिएशन 2021-22 सीजन के अनुमान 15 जनवरी को लगाएगी और तब ही फसल के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।

आईएसीओएसएआईए एक सदस्य का कहना था कि बाजार में तेजी लग रही है और ऐसे में माल बेचकर चलने में जोखिम लग रहा है।

एक अन्य सदस्य श्री राजेश चौधरी का कहना था कि पहले देश में काटन का अनुमान 337 लाख गांठ का था लेकिन अब हालात देख कर लगता है कि यह 278 लाख गांठ पर ही सिमट जाएगा।

आस्ट्रोगुरु कर्नल अजय अग्रवाल का कहना था कि इस वर्ष बढ़िया काटन के उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है और यही कारण है कि भाव में तेजी आ रही है।

आमतौर पर ए ग्रेड की काटन का उत्पादन कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत तक होता है लेकिन इस वर्ष इसकी मात्रा केवल 20 प्रतिशत ही होने की संभावना है।

हल्की क्वालिटी की काटन उपलब्धता अधिक है।

उनका भी मानना था कि यदि सरकारी हस्तपेक्ष नहीं होता है तो भाव में तेजी की संभावना है लेकिन इसके लिए एक बार मंदा आना जरुरी है।

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